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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की गीतांजलि श्री ने जीता प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार

नई दिल्ली। भारत की लेखिका गीतांजलि श्री (Geetanjali Shree) ने इस साल का प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार जीता है। यह पुरस्कार उनके उपन्यास टॉम्ब ऑफ सैंड के लिए दिया गया है। गीतांजलि श्री का उपन्यास रीत समाधि नाम से हिंदी में प्रकाशित हुआ था। गीतांजलि श्री उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली हैं। खास बात यह है कि टॉम्ब ऑफ सैंड यह किताब जीतने वाली हिंदी भाषा की पहली किताब है। यह किसी भी भारतीय भाषा में पुरस्कार जीतने वाली पहली पुस्तक भी है।
लेखिका गीतांजलि श्री को गुरुवार 26 मई 2022 को लंदन में बुकर पुरस्कार प्रदान किया गया। गीतांजलि को 50,000 पाउंड की पुरस्कार राशि मिली, जिसे वह डेज़ी रॉकवेल के साथ साझा करेंगी। अमेरिकी लेखक-चित्रकार डेज़ी रॉकवेल द्वारा इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था।
गीतांजलि श्री का उपन्यास दुनिया की उन 13 किताबों में शामिल था जिन्हें पुरस्कारों की सूची में शामिल किया गया था। पुरस्कार की घोषणा 7 अप्रैल 2022 को लंदन पुस्तक मेले में की गई थी, लेकिन अब विजेता की घोषणा कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की गीतांजलि श्री ने पुरस्कार प्राप्त करते हुए खुशी जाहिर करते हुए कहा- मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था। यह एक बड़ी उपलब्धि है। मैं हैरान हूं, मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कर सकता हूं।
उन्होंने कहा- मैं हिंदी-अंग्रेजी और फ्रेेंच प्रकाशकों सहित अपने फ्र्रांसीसी अनुवादक अनिमांटो का आभारी हूं। गीतांजलि श्री अब तक तीन उपन्यास और कहानियों का संग्रह लिख चुकी हैं।
उनके उपन्यासों और कथा संग्रहों का अंग्रेजी, जर्मन, सर्बियाई, फ्रेंच और कोरियाई भाषाओं में अनुवाद किया गया है। रेत समाधि एक अस्सी वर्षीय महिला की कहानी है जो विभाजन के दर्द को सहती है।
वह कई मुसीबतें उठाती है और पाकिस्तान की यात्रा करती है। जूरी ने इस उपन्यास को भावनाओं का समुद्र कहा। जूरी ने माना कि उसने एक महिला की भावनाओं पर श्रमसाध्य लिखा है। इसे हर पाठक महसूस कर सकता है।
















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